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बिहार में बड़ा राशन कार्ड सत्यापन अभियान: 5.57 लाख कार्ड रद्द, अपात्र लाभार्थियों पर गिरी गाज

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बिहार सरकार ने PDS सत्यापन अभियान के तहत 5.57 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। मृत, पलायन कर चुके और अपात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर किया गया है।

पटना/आलम की खबर:पटना/आलम की खबर: बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए चलाए जा रहे बड़े सत्यापन अभियान के तहत राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और सख्त कदम उठाया है। व्यापक जांच और डेटा मिलान के बाद सरकार ने राज्यभर में करीब 5.57 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राशन व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है और अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

सरकारी जानकारी के अनुसार यह पूरा अभियान राशन कार्डधारकों के भौतिक सत्यापन, ई-केवाईसी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार मतदाता सूची के मिलान के आधार पर चलाया गया। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके पात्र हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग योजना का लाभ उठा रहे थे जो नियमों के अनुसार पात्रता की श्रेणी में नहीं आते थे।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कुल 8.19 लाख राशन कार्डों को जांच के लिए चिन्हित किया गया था। इनमें से लगभग 97.56 प्रतिशत मामलों की जांच पूरी कर ली गई है। जांच के बाद 5.57 लाख राशन कार्डों को रद्द करने का निर्णय लिया गया, जबकि करीब 2.59 लाख कार्डों को सही और वैध पाते हुए उन्हें योजना का लाभ जारी रखने की अनुमति दी गई है।

विभागीय मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण कारण सामने आए जिनकी वजह से कार्ड रद्द किए गए। सबसे बड़ी संख्या ऐसे मामलों की थी जिनमें लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम अब भी राशन सूची में दर्ज थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी पाए गए जो स्थायी रूप से दूसरे राज्यों या शहरों में पलायन कर चुके थे, लेकिन बिहार की राशन योजना का लाभ ले रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि कई लाभार्थियों ने अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, जिसके कारण उनके नाम सूची से हटा दिए गए। इसके साथ ही कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि कई लोग निर्धारित आय सीमा से अधिक आय अर्जित कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद वे गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। सरकार ने ऐसे सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए सूची से बाहर करने की कार्रवाई की है।

जिला स्तर पर देखें तो पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया और भागलपुर जिलों में सबसे अधिक राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी चिन्हित हुए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने संबंधित सूची सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं ताकि लोग अपने नाम की स्थिति की जांच कर सकें।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलती से सूची से हट गया है, तो उसे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे लाभार्थी अपने नजदीकी अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय में आवेदन देकर पुनः जांच की मांग कर सकते हैं। जांच में पात्र पाए जाने पर उनका नाम दोबारा सूची में शामिल किया जाएगा और उन्हें योजना का लाभ जारी रहेगा।

इस अभियान के पीछे केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का भी प्रभाव बताया जा रहा है। देशभर में विभिन्न राज्यों में किए गए निरीक्षण में यह पाया गया कि कई लोग आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद मुफ्त राशन योजना का लाभ ले रहे थे। इसके बाद केंद्र ने राज्यों को लाभार्थियों की सूची का पुनः सत्यापन करने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी का हक छीनना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार अपात्र लोगों के हटने से संसाधनों का बेहतर वितरण होगा और योजना अधिक प्रभावी बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार की राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। आने वाले समय में यह अभियान और सख्त किया जा सकता है ताकि कोई भी अपात्र व्यक्ति सरकारी लाभ से वंचित न रहे।

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